Option Trading in Hindi
Option Trading in Hindi
Introduction:-
ऑप्शन ट्रेडिंग एक ट्रेडिंग का ऐसा प्रकार जिसमें बहुत कम इन्वेस्टमेंट में या यह कहें बहुत कम लागत में अच्छी इनकम अच्छा पैसा जनरेट किया जा सकता है ऑप्शंस ऐसे कांटेक्ट होते हैं जिनमें आप आभासी शेयर खरीदते हैं यानी एक तरह से आप शेयर खरीदते भी हैं और नहीं भी यानी एक तरह से आप शेयर के मूल्य को किराए पर लेते हैं शेयर को किराए पर लेते हैं!
शेयर मार्केट में काम करने के लिए अपना डीमेट अकॉउंट खोले फ्री में :-सबसे कम ब्रोकरेज 15 रुपए पर आर्डर मै ट्रेड करें और एल्गो ट्रेडिंग भी फ्री मै करें
तो आइए इसका अर्थ समझते हैं कि शेयर को किराए पर लेने का मतलब क्या होता है?
शेयर को किराए पर लेने का मतलब होता है जैसे किसी शेयर की कीमत 20000 हैं और आपके पास 20000 रुपए ही है तो आप उस कंपनी का केवल एक शेयर खरीद सकते हैं!
इसका मतलब यह हुआ कि आप उस शेयर में अगर कोई परिवर्तन होता है यानी उसका मूल्य बढ़ता है तो आपको फायदा केवल एक शेयर पर ही मिलेगा!
और आपको अगर शेयर उसके 10 खरीदने हैं तो आपको 200000 खर्च करने होंगे! जबकि आपके पास 200000 है नहीं! तो ऐसी स्थिति में जिन लोगों के पास 200000 नहीं है वह उस शेयर का ऑप्शन खरीदते हैं यानी उसे किराए पर लेते हैं कुछ समय के लिए उसमें एक हफ्ता 1 महीना हो सकता है!
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कुछ ऑप्शंस के कॉन्ट्रैक्ट साप्ताहिक होते हैं और कुछ के कॉन्ट्रैक्ट मंथली होते हैं!
यानी आप एक कॉन्ट्रैक्ट को खरीदते हैं जिसमें यह कहा गया है कि आप समय सीमा में उस शेयर को खरीद लेंगे यानी जैसे आप कोई मकान खरीदते हैं तो उसके लिए साईं यह जो टोकन अमाउंट देते हैं और आप उस मकान के आभासी मालिक बन जाते हैं!
उसी प्रकार हर शेयर का एक लोट होता है यानी हर शेयर का ऑप्शन कॉन्ट्रैक्ट होता है जो वीकली या मंथली के रूप में होता है! और उसकी एक लॉट साइज होती है जैसे 50 100, 500,5000,10000 आदि!
अब एक उदाहरण लेते हैं जैसे रिलायंस के शेयर की कीमत 2500 है अगर आपके पास ढाई हजार है तो आप एक शेयर खरीद सकते हैं और इसके 10 शेयर खरीदने के लिए आपको 25000 की जरूरत पड़ेगी!
जबकि आप इसके ऑप्शन का लौट खरीदते हैं तो ढाई सौ शेयर का लौट आता है यानी किसी लौट की कीमत 100 है तो वह 25000 में आपको ढाई सौ शेयर मिल जाएंगे!
और आपकी ऑप्शन की कीमत में 1 रुपए भी बढ़ने घटने पर आपको ढाई सौ शेयर पर फायदा या नुकसान मिलेगा!
ऑप्शंस के प्रकार:-
मुख्य रूप से ऑप्शन दो प्रकार के होते हैं
1. स्टॉक ऑप्शंस
2. इंडेक्स ऑप्शंस
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1. स्टॉक ऑप्शंस:-
यह ऑप्शन आपके कंपनियों के ऑप्शन होते हैं यानी जिन कंपनियों के शेयर भी आप खरीद सकते हैं उनके ऑप्शन होते हैं यह मंथली होते हैं और कुछ परिस्थितियों में दो से 3 मंथ भी इनकी वैलिडिटी होती है!
यानी जुलाई में आप सितंबर महीने का ऑप्शन भी खरीद सकते हैं जितनी दूर का ऑप्शन खरीदते हैं वह उतना ही महंगी प्राइस में हमें प्राप्त होता है!
यानी जुलाई महीने की तुलना में सितंबर का ऑप्शन हमें महंगी प्राइस पर प्राप्त होगा क्योंकि उसकी वैलिडिटी भी दो-तीन महीने बढ़ जाएगी! अर्थात अभी जुलाई चल रहा है तो उसकी वैलिडिटी सितंबर के अंत तक रहेगी!
यहां पर आप अलग-अलग कंपनियों के ऑप्शंस अलग-अलग खरीद सकते हैं जिनकी लॉट का साइज और कीमत भी अलग-अलग होती है कहीं लौट 100 शेयर के होते हैं तो कहीं 10000 शेयर के हर कंपनी की अपनी ग्रोथ या शेयर प्राइस के नीचे जाने पर अपना अलग प्रभाव होता है!
ऑप्शन ट्रेडिंग सीखें
2. इंडेक्स ऑप्शन:-
इंडेक्स वह सेगमेंट होता है जिनके शेयर्स को हम डायरेक्ट नहीं खरीद सकते यानी वह कुछ कंपनियों के ग्रुप के शेयर होते हैं जैसे बैंक निफ़्टी सभी बैंकों का शेयर का एक समूह होता है! मान लीजिए 10 से 15 बैंक की इस ग्रुप में है तो उनके परिवर्तन के आधार पर इस सेगमेंट में परिवर्तन होता है इनके केवल ऑप्शन ही उपलब्ध होते हैं!
ज्यादातर लोग इंडेक्स ऑप्शन में काम करना ही पसंद करते हैं इसका एक बहुत बड़ा कारण यह भी है कि एक तो इसकी लॉट साइज बहुत कम होती हैं अर्थात सस्ते में ही इनको खरीदा जा सकता है!
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अभी की बात करें तो अभी तीन तरह के इंडेक्स ऑप्शन भारतीय शेयर मार्केट में उपलब्ध हैं जिनमें बैंक निफ़्टी, निफ़्टी फिफ्टी, और फिन निफ़्टी मुख्य हैं!
निफ्टी का लॉट साइज 50 का फिन निफ़्टी का 40 का और बैंक निफ़्टी का लोट साइज 25 का होता है अर्थात एक ऑप्शन खरीदने पर 50,40 या 25 का लॉट हमें प्राप्त होता है!
ऑप्शन ट्रेडिंग के प्रकार :-
ऑप्शन ट्रेडिंग में मुख्यतः दो प्रकार के ऑप्शन होते हैं जिन्हें हम कॉल ऑप्शंस और पुट ऑप्शंस कहते हैं!
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कॉल ऑप्शन:-
जैसा जिसके नाम में ही दर्शाया गया है कि कॉल का मतलब होता है ऊपर जाना यानी कोई व्यक्ति कॉल ऑप्शन अगर खरीदता है तो वह यह डिसाइड करता है कि मार्केट का प्राइस ऊपर ही जाएगा!
यानी टेक्निकल ऑफ फंडामेंटल नॉलेज के आधार पर उसने यह पता लगा लिया है कि मार्केट के ऊपर जाने की संभावना है कोई व्यक्ति कॉल ऑप्शन खरीदता है!
और इस कॉल ऑप्शन की भी स्ट्राइक प्राइस होती है वह प्राइस जहां तक के लिए हम अंदाजा लगाते हैं जैसे किसी शेयर की प्राइस या इंडेक्स प्राइस मान लीजिए 17500 चल रही है तो विभिन्न प्रकार के कॉल ऑप्शंस को हम खरीद सकते हैं!
ऑप्शन ट्रेडिंग के लिए बेस्ट बुक्स
यानी 17500,17550, 17600 और भी इसके आगे जो चाहे या इसके नीचे भी जो चाहे 17400, 17450, आदि!
कुल मिलाकर हम मार्केट के ऊपर जाने का अंदाजा लगा रहे हैं!
यानी मार्केट 17500 से जितना ऊपर जाएगा उतना ही हमारे कॉल ऑप्शन जो हमने खरीदा है उसकी प्राइस भी उसी अनुपात में बढ़ेगी!
जितना हमारा स्ट्राइक प्राइस 17500 के पास होगा या 17500 से कम होगा उस कॉल ऑप्शन की कीमत उतनी ही ज्यादा होती है!
17500 के अंदर के कॉल ऑप्शन को इन दा मनी कॉल ऑप्शन कहते हैं और 17500 से ऊपर के कॉल ऑप्शन को आउट दा मनी कॉल ऑप्शन कहते हैं और 17500 स्ट्राइक प्राइस के कॉल ऑप्शन को एट द मनी कॉल ऑप्शन कहते हैं!
ऑप्शन ट्रेडिंग की ए टू जेड नॉलेज
पुट ऑप्शन:-
और दूसरे प्रकार के ऑप्शन को पुट ऑप्शन कहते हैं जैसा कि नाम में बताया गया है कि पुट याने गिरना यानी जब हमें मार्केट के बारे में यह अंदाजा होता है कि मार्केट नीचे जाएगा तो हम पुट ऑप्शन खरीदते हैं!
और जितना ज्यादा मार्केट नीचे जाता है हमारी स्ट्राइक प्राइस से हमें उतना ही लाभ प्राप्त होता है इसका मतलब यह हुआ कि जितना मार्केट नीचे जाएगा उतना ही हम पैसा कमा पाएंगे पुट ऑप्शन के खरीदने पर!
पुट ऑप्शंस में भी स्ट्राइक प्राइस होती है जैसे कि मार्केट 17500 चल रहा है अभी तो 17450, 17500, 17400, इसी प्रकार 17550,17600, यह सभी स्ट्राइक प्राइस कि हम पुट ऑप्शंस खरीद सकते हैं!
अभी जो भी प्राइस चल रहा है उसका पुट ऑप्शन हम खरीदते हैं तो उसे ऐट दामनी पुट ऑप्शन कहते हैं उस प्राइस के नीचे का ऑप्शन खरीदते हैं तो उसे आउट द मनी और उस प्राइस से ऊपर का ऑप्शन खरीदते हैं तो उसे इन दा मनी पुट ऑप्शन कहते हैं!
ऑप्शन सेगमेंट में काम करने पर हमारा पैसा अद्भुत रूप से बढ़ता है जैसे हमारा पैसा एक ही दिन में 2 गुना 10 गुना 20 गुना कितना भी हो सकता है इसी प्रकार बढ़ता है उसी प्रकार से घटता भी है यानी 100 का ऑप्शन 1 दिन में 20,10 तक भी आ सकता है!
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ऑप्शन सेगमेंट में काम करने के साथ-साथ रिस्क भी ज्यादा होता है तो रिवॉर्ड भी ज्यादा होता है ऑप्शन सेगमेंट में काम करने पर हम मार्केट ऊपर जाए तो भी पैसा कमा सकते हैं और मार्केट नीचे जाए तो भी पैसा कमा सकते हैं!
यहां हमने अब तक जो बात की वह ऑप्शन को बाय करने आने खरीदने के बारे में बात की इसमें भी और कई बातें हैं सीखने के लिए इसी तरह ऑप्शन बाइंग की तरह ही ऑप्शन सेलिंग भी होती है और फ्यूचर बाइंग और सेलिंग भी होती है! जिनमें ज्यादा पूंजी की आवश्यकता होती है काम करने के लिए!
ऑप्शन ट्रेडिंग के बारे में और अधिक जानकारी प्राप्त करने के लिए पढ़ते रहे! ट्रेडिंग शेयर मार्केट ऐसा समुद्र है जिसमें समझने सोचने के लिए बहुत कुछ है और जानने के लिए भी बहुत कुछ जितना आप जानते जाएंगे सीखते जाएंगे उतना ही से पैसा बना भी पाएंगे!
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